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काम की प्रबलता एवं उसका रूपांतरण 4. काम-शक्ति को रूपांतरित करनेवाली स्त्री -पिँगला

कथा है कि पिँगला नाम की एक वेश्या थी , जो अपनी सुन्दरता एवं चंचलता के लिए बड़ी प्रसिद्ध थी । बहुत से धनी भोगी लोग उसके यहाँ आया करते थे और उसकी सुन्दरता पर बेशुमार धन लुटाते रहते थे । वह वेश्या भी हमेशा रात्री मेँ नाना भाँति से सजकर बैठा करती थी । एक दिन एक विषयी पुरूष आया और उसे वचन देकर धन लाने चला गया । इधर पिँगला शय्या सजाकर उसकी प्रतीक्षा मेँ आशा लगाये बैठी रही । दो प्रहर रात बीत गयी और जब वह नहीँ आया , तब वेश्या काम से पीड़ित हो परेशान होने लगी । इतने मेँ उसने देखा कि उधर से दत्तात्रेय जी महाराज अपनी मस्ती मेँ झूमते-झामते चले आ रहे हैँ । उनको देखकर वह विचारने लगी कि जनक राज की इस विशाल नगरी मेँ मैँ ही एक मूर्ख हूँ जो दूसरे पुरुषोँ से सुख चाहती हूँ । वे मुझे क्या सुख देँगे , मेरी क्या तृप्ति करेँगे , यदि उनके पास सुख होता तो वे मेरे पास भला क्योँ आते ? जो स्वयं अपनी प्यास नहीँ बुझा सकता , भला दूसरे की क्या बुझायेगा ? दत्तात्रेयजी महाराज की मस्ती देखकर उसके मन मेँ सद्‌विचार आये , उसके ह्रदय मेँ ज्ञान उत्पन्न हुआ । तब विषय-इच्छा त्याग कर वह भगवान्‌ के भजन मेँ लग गयी । उसने सोचा कि अबतक मैँने बड़ी भूल की , अब मैँ अपना अमूल्य समय नष्ट नहीँ करूँगी । उसके जीवन मेँ ऐसा परिवर्तन आया कि वह वेश्या से एक साधिका बन गई । यह काम-शक्ति का संशोधन एवं ऊर्ध्वगमन नहीँ तो और क्या ? जो कोई इस काम की प्रबल धारा को बदल लेता है , वह वेश्या से साधिका , कातिल से ऋषि और भोगी से योगी बन जाता है । इस ब्रह्मचर्य शक्ति का ऊर्ध्वगमन करके कौन नहीँ महान्‌ हुआ ? राजा भर्तृहरि जो हमेशा वासनामय जीवन बिताता था , जब उन्हेँ इस काम की असलियत का पता लगा , तो उन्होँने उसका रूपान्तर किया और वे एक अच्छे साधु बन गये । इनकी भी कहानी बड़ी मनोरंजनक है ।

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