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धन के कारण

धन के कारण
जो अधिक धन-लाभ , पद-लाभ तथा सम्मान लाभ चाहता है वह अधिक पाप करता है तथा अधिक अशांत होता है और अंतत: हानी उठाता है । अधिक लाभ की इच्छावाले दुर्योधन ने अपना सब कुछ खोया । पर-स्त्री के भोग की कामना मेँ रावण ने अपना सर्वनाश किया । तृष्णाहीन मनुष्य सच्चे स्वर्ग और मोक्ष का उपभोग करता है ।

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